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सच का आईना

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हमारे देश भारत में बलात्कार चौथा कॉमन क्राइम है ” अगेंस्ट द वूमेन”*

2021 के एनुअल रिपोर्ट नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के मुताबिक (NCRB) 31,677 रेप केस रजिस्टर्ड किए जाते हैं, और औसतन 86 केस रोज के होते हैं ।

तो सबसे पहला सवाल जो मन में उठता है वो ये है कि जो रेप करते हैं उनमें इतनी हिम्मत आती कहां से है ? क्या उनके लिए किसी ऐसी सज़ा का प्रावधान नहीं है जिस सजा को देखकर सजा पाने वाले के साथ – साथ देखने वाले की भी रूह कांप जाए और दोबारा कोई ऐसी गलती करना तो दूर बल्कि ऐसा सोचने से भी कतराए।


हमारे देश भारत में सज़ा का प्रावधान तो है पर दोषी को सज़ा देने में और पीड़िता को न्याय मिलने में इतनी देरी हो जाती है कि बस दोषी अपनी गलती भूल जाता है और अपने तरह की सोच रखने वाले हज़ार दोषियों की हिम्मत बन जाता है और वहीं दूसरी तरफ वो पीड़िता खुद को दोषी मानकर घर में क़ैद हो जाती है और उसकी तरह हज़ार निर्दोष पीड़िता बेवजह इस पीड़ा की शिकार बनते जाती है ।
” न्याय में देरी यानी कि न्याय की हत्या ” और इस कथन का सबसे अच्छा उदाहरण है ” निर्भया हत्याकांड” , इस केस से तो हमसब वाक़िफ हैं, 16 दिसंबर 2012 को इस कांड को अंजाम दिया गया जिसमें एक अकेली लड़की के साथ चलती बस में 6 लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया । और ये हमारे न्यायिक सिस्टम के लिए बहुत ही शर्म की बात है कि उन अपराधियों को उनके गुनाहों की सज़ा मिलने में 7 साल का लंबा वक्त गुज़र गया जहां एक निर्भया को न्याय मिलने में इतना वक्त लग गया कि उस बीच न जाने और कितनी ही और निर्भया ने अपनी जान गवां दी ।
इसके बावजूद भी आप कुछ लोगों के मुंह से सुनते होंगे कि रेप की वजह लड़कियों का फ़ैशन, उनके छोटे कपड़े, उनका यूं आज़ाद घूमना , लड़कों से बात करना इत्यादि है ।
क्या सच में इन बातों में कोई लॉजिक है , किसी भी लड़की का रेप उनके कपड़े देखकर नहीं बल्कि उनका लड़की होना देखकर किया जाता है । और अगर रही बात कपड़ों की तो मैं आपको बताना चाहूंगी कि तेलंगाना राज्य के वारंगल नगर में एक नौ महीने की बच्ची के साथ 22 साल के नौजवान ने रेप किया ।
अब बताएं इनमें कपड़ों का क्या दोष था ? उज्जैन रेप केस जहां एक 12 साल की बच्ची के साथ रेप करके उसे आधे कपड़ों में ऐसे ही उज्जैन की सड़कों पे छोड़ दिया जाता है जहां वो बच्ची 8 km इसी अवस्था में भटकती है पर कोई उसकी सहायता के लिए आगे तक नहीं आता , इसमें उस लड़की का क्या दोष है अगर है तो बस इतना दोष है कि वो एक लड़की है ।
जहां तीज़ – त्यौहार के पावन अवसर पर देवी बनाके उन्हें पूजा जाता है , वहीं अकेला पाकर उन्हें नोच के लुटा जाता है ।
” हमें देवी मत बनाओ , हम इंसान ही अच्छे हैं
अगर बनाना ही है तो उन्हें इंसान बनाओ
जो इंसान के रूप में राक्षस बने बैठें हैं “।

लेख: रेणु
निम्स राजस्थान
renu10122005@gmail.com

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