
धौलपुर। विद्या भारती की विद्वत परिषद द्वारा प्रबुद्धजन विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और जीवन मूल्य, समाज जागरण में विद्या भारती की भूमिका और पंच परिवर्तन और हमारी भूमिका विषय पर आयोजित गोष्ठी के प्रारम्भ में माँ भारती और माँ सरस्वती के चित्र पर अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण किया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता के रूप में पधारे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.इंदुशेखर तत्पुरुष ने शिक्षा और जीवन मूल्यों पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि शिक्षा में आदर्श जीवन मूल्यों की आज विशेष आवश्यकता है। शिक्षा और जीवन मूल्य दो प्रमुख और महत्वपूर्ण विषय हैं जो हमारे जीवन के निर्माण और समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा हमें ज्ञान, विचारशीलता और विचारों की विस्तारित क्षमता प्रदान करती है। यह हमें सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। जीवन मूल्य हमारे आचरण और नैतिक मूल्यों का प्रतिपादन करते हैं। ये हमें सच्चाई, ईमानदारी, समर्पण, सहानुभूति, और परिवार महत्व की महत्वाकांक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा और जीवन मूल्य हमारे संपूर्ण विकास में मदद करते हैं और एक यथार्थपूर्ण और समृद्ध जीवन की ओर प्रशस्ति करते हैं। इसलिए, हमें इन दोनों को सदैव महत्वपूर्ण रखना चाहिए और उन्हें अपने जीवन में अंतर्निहित करना चाहिए।
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रो.भरतराम कुम्हार ने उपस्थित प्रबुद्धजनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विद्या भारती भारत का सबसे बड़ा गैर-सरकारी शिक्षा संगठन है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध है और भारतीय संस्कृति व मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रदान करता है, जिसके तहत देशभर में हज़ारों स्कूल संचालित होते हैं, जो प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक बच्चों का सर्वांगीण विकास करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य दीन-दुखियों को शिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाना और राष्ट्र निर्माण करना है। आज विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यालयों के छात्र देश-विदेश में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्या भारती देश भर में विद्यालयों के माध्यम से छात्रों में राष्ट्रभक्ति की भावना और संस्कार पैदा कर रही है। आरएसएस के विभाग प्रचारक उत्कर्ष ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत अपनी सनातन संस्कृति, सभ्यता, और परंपराओं के कारण अनादिकाल से विश्व का मार्गदर्शन करता आया है। आज जब देश 21वीं शताब्दी में एक नई ऊंचाई की ओर अग्रसर है, समाज में अनुशासन, देशभक्ति और समरसता की पुनर्स्थापना एक प्रमुख आवश्यकता बन गई है। इस दिशा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पिछले 99 वर्षों में निःस्वार्थ सेवा और समर्पण से राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय एवं अविस्मरणीय योगदान दिया है। समाज में अनुशासन और सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से संघ ने ‘पंच परिवर्तन’ का आह्वान किया है, जो न केवल विकसित भारत की नींव रखने में सहायता करेगा, बल्कि समाज को एक नई दिशा देगा।
विद्वत परिषद के प्रांत संयोजक बृजेश कुमार गुप्ता ने परिषद के क्रियाकलापों पर प्रकाश डाला। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे विमल भार्गव ने सभी से पंच परिवर्तन के अनुसार जीवन जीने की सलाह दी। विद्या भारती के जिलाध्यक्ष नाहर सिंह व जिला व्यवस्थापक यदुनाथ शर्मा सहित अतिथियों ने विद्या भारती संस्थान के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया तथा गोष्ठी का संचालन अनुराग शर्मा ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में जिले भर के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे ।


















































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