
टोंक । राज्य सरकार के निर्देश के बाद सड़क सुरक्षा के मद्देनजर टोंक नगर परिषद ने भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। लेकिन अभियान की शुरुआत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर परिषद का ‘पीला पंजा’ अब तक सिर्फ अस्थाई केबिनों और थड़ी वालों पर ही चला है, जिनसे रोज़ीरोटी चलाने वाले छोटे व्यापारियों को हटाकर फिर से अनिश्चितता में धकेल दिया गया है।
रविवार को बस स्टैंड–बमोर पुलिया क्षेत्र में कार्रवाई
रविवार को नगर परिषद की टीम बस स्टैंड से बमोर पुलिया की तरफ नए हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में पहुंची। यहां गंदे नाले के ऊपर रखी अस्थाई केबिनों को हटाया गया। इन केबिनों के सहारे परिवारों की आजीविका चल रही थी, लेकिन बिना वैकल्पिक व्यवस्था दिए उन्हें वहां से भगा दिया गया।
राज्य सरकार ने 30 दिसंबर तक सभी नगरीय निकायों को विशेष अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। इसी के तहत छावनी, हायर सेकेंडरी स्कूल सहित कई क्षेत्रों में भी अस्थाई दुकानों को हटाया गया है।
मुख्य बाजारों में कार्रवाई का अल्टीमेटम, लेकिन भरोसा कम
नगर परिषद ने घंटाघर से पटेल सर्किल तक के दुकानदारों को चेतावनी दी है कि वे सोमवार से फुटपाथ के नीचे कोई सामान नहीं रखें। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि असली अतिक्रमण तो यहीं है—फिर कार्रवाई सिर्फ अस्थाई दुकानदारों पर ही क्यों?
क्या यह अभियान स्थाई है या ‘चार दिन की चांदनी’?
टोंक के नागरिकों के मन में बड़ा सवाल है—क्या नगर परिषद इस अभियान को लगातार चलाने की हिम्मत दिखाएगी, या फिर यह भी कुछ दिनों में ठंडा पड़ जाएगा?
लोगों का आरोप है कि प्रशासन बड़े और स्थाई कब्जों पर हाथ नहीं डालता, जबकि छोटे दुकानदारों पर तुरंत कार्रवाई कर दी जाती है।
अतिक्रमण हटाओ अभियान की दिशा और नीयत पर अब बहस शुरू हो गई है। जनता की नजरें अब नगर परिषद पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन शहर के मुख्य बाजारों में भी समान रूप से कार्रवाई करेगा, या यह अभियान केवल अस्थाई दुकानों तक ही सीमित होकर रह जाएगा।



























Leave a Reply