होम देश राजनीति अपराध खेल धर्म मनोरंजन विश्व व्यापार शिक्षा स्वास्थ्य राज्य राजस्थान जैसलमेर जलोर जयपुर चूरू चित्तौड़गढ़ कोटा करौली उदयपुर अलवर अजमेर प्रतापगढ़ पाली नागौर धौलपुर दौसा डूंगरपुर टोंक झुंझुनू जोधपुर हनुमानगढ़ सीकर सिरोही सवाई माधोपुर श्री गंगानगर राजसमंद भीलवाड़ा भरतपुर बूंदी बीकानेर बांसवाड़ा बारां बाड़मेर

सच का आईना

Advertisement

ग्राम उत्थान शिविर : सफलता की कहानी जसराम यादव बने नवाचार और जैविक खेती की मिसाल

सवाई माधोपुर, 31 जनवरी। जिले की पंचायत समिति चौथ का बरवाड़ा के शिवाड़ में आयोजित ग्राम उत्थान शिविर में इसरदा निवासी किसान जसराम यादव ने नवाचार, जैविक खेती और सरकारी योजनाओं के समुचित उपयोग से आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की पहल पर आयोजित शिविरों के दूसरे चरण में शनिवार को शिवाड़ के शिविर में पहुंचे यादव ने बताया कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के सहयोग से उन्होंने परंपरागत खेती को बहुआयामी और अधिक लाभकारी स्वरूप दिया है।
जसराम यादव ने अपनी कृषि भूमि पर 1,230 घन मीटर क्षमता का फार्म पौंड निर्मित कराया है, जिससे वर्षा जल संग्रह कर आधुनिक तकनीक के माध्यम से फसलों की सिंचाई की जा रही है। इसके लिए उन्हें विभिन्न विभागीय योजनाओं के तहत 63 हजार रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ। जल संरक्षण के चलते लागत घटने के साथ ही उनकी उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।जसराम यादव ने अपने खेतों में रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक खादों को अपनाया, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य में निरंतर सुधार हुआ है। उन्होंने पशुपालन को भी खेती से जोड़ा है—उनके पास गाय/भैंस हैं, जिनसे प्राप्त गोबर का उपयोग जैविक खाद के रूप में किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, पीकेवीवाई योजना के अंतर्गत वर्मी बेड का निर्माण कर गेहूं सहित अन्य फसलों में जैविक पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकारी योजनाओं के माध्यम से जसराम यादव ने फार्म पौंड, वर्मी कंपोस्ट, पाइपलाइन, तारबंदी आदि योजनाओं का लाभ लेकर अनुदान प्राप्त किया। इन नवाचारों और संसाधनों के समेकित उपयोग से उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
ग्राम उत्थान शिविर में प्रस्तुत जसराम यादव का यह बहुआयामी कृषि मॉडल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बना। यह सफलता कहानी संदेश देती है कि नवाचार, जैविक खेती और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से खेती को टिकाऊ और लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *