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सच का आईना

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धरती माता बचाओ अभियान” के अंतर्गत चौथ का बरवाड़ा में उपखण्ड स्तरीय निगरानी समिति की बैठक आयोजित

चौथ का बरवाड़ा | कृषि आयुक्तालय, जयपुर के निर्देशानुसार कृषकों को भूमि में उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक करने, अनुदानित उर्वरकों के औद्योगिक उपयोग एवं राज्य से बाहर अवैध परिगमन पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा संचालित “धरती माता बचाओ अभियान” के अंतर्गत गठित निगरानी समितियों की प्रथम बैठक उपखण्ड चौथ का बरवाड़ा में पंचायत समिति सभागार में “धरती माता बचाओ अभियान” के अंतर्गत उपखण्ड स्तरीय निगरानी समिति की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता तहसीलदार नीरज सिंह द्वारा की गई। बैठक में सहायक कृषि अधिकारी विजय जैन, पुलिस विभाग के प्रतिनिधि हेड कांस्टेबल सीताराम एवं श्यामवीर, सहकारिता विभाग के प्रतिनिधि श्री पर्वत सिंह, वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक लोकेश मीना, क्षेत्र के आदान विक्रेता ओमप्रकाश कासलीवाल, समंदर सिंह, फौजी शिवराज खटाना एवं प्रहलाद मीना सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।बैठक के दौरान जिला एवं उपखण्ड स्तर पर उर्वरक खपत की समीक्षा की गई तथा ग्राम पंचायत स्तर पर खरीफ एवं रबी फसल से पूर्व ग्राम सभाओं के आयोजन, उर्वरक प्रबंधन हेतु नियमित बैठकों के संचालन, कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुरूप उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करने तथा घटिया उर्वरकों के निर्माण एवं विक्रय, अनुदानित उर्वरकों के गैर-कृषि उपयोग एवं अवैध परिगमन की रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।सहायक कृषि अधिकारी विजय जैन ने जानकारी दी कि अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर पर गठित निगरानी समितियों के माध्यम से उर्वरकों की आपूर्ति, वितरण एवं उपयोग पर सतत निगरानी रखी जाएगी तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।बैठक में उपस्थित क्षेत्र के आदान विक्रेताओं द्वारा आश्वस्त किया गया कि कृषकों को यूरिया सहित अन्य उर्वरकों की किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी तथा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही उर्वरकों का विक्रय किया जाएगा।अध्यक्ष तहसीलदार नीरज सिंह ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए अभियान को प्रभावी रूप से लागू करने, की गई कार्यवाहियों की नियमित समीक्षा करने एवं प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर उच्च अधिकारियों को प्रेषित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि “धरती माता बचाओ अभियान” का मुख्य उद्देश्य भूमि की उर्वरता को संरक्षित रखते हुए सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना है, जिसमें सभी विभागों के साथ-साथ कृषकों की सक्रिय सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।

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