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सच का आईना

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डूंगरी बांध विरोध आंदोलन के बीच आखिर कृषि मंत्री ने जनजाति एवं क्षेत्रीय विकास मंत्री को क्यों लिखी चिट्ठी

डूंगरी बांध विरोध आंदोलन के बीच आखिर कृषि मंत्री ने जनजाति एवं क्षेत्रीय विकास मंत्री को क्यों लिखी चिट्ठी

क्या डॉ. किरोड़ी की चिट्ठी के बाद भूरिपहाड़ी गांव के लोगों की यह मांग हो पाएगी पूरी ?  

मलारना डूंगर (सवाईमाधोपुर) PKC – ERCP के तहत प्रस्तावित डूंगरी बांध विरोध आंदोलन के बीच कृषि मंत्री एवं सवाईमाधोपुर विधायक डॉ. किरोड़ी लाल मीना की ओर से जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के मंत्री को लिखी एक चिट्ठी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। डूंगरी बांध के डूब क्षेत्र में आने से भुरिपहाड़ी गांव सत-प्रतिशत विस्थापित होने वाले गांवों की सूची में शामिल है। वहीं अब कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीना ने सवाईमाधोपुर जिले के भूरिपहाड़ी गांव में जनजाति शोध संस्थान खोलने की स्वीकृति देने के लिए जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री को एक चिट्ठी लिखी है। ऐसे में डूंगरी बांध को लेकर विरोध आंदोलन कर रहे लोगों में संशय बना हुआ है। इसे लेकर लोग सवाल भी कर रहे हैं। सरकार ने क्या भुरिपहाड़ी गांव का विस्थापन टाल दिया है? जनजाति शोध संस्था खुलने से क्या डूंगरी बांध निर्माण रुक जाएगा। गांव विस्थापित हुआ तो, शोध संस्थान कहां बनेगा? फिलहाल इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है। 

कृषि मंत्री ने क्यों लिखी चिट्ठी

बतादें कि भाजपा नेता एवं भुरिपहाड़ी निवासी पंचायत समिति सदस्य नारंगी मीना ने सवाईमाधोपुर विधायक एवं कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीना को एक पत्र लिख कर भुरिपहाड़ी गांव में जनजाति शोध संस्था खोलेने की मांग की थी। इसी के आधार पर कृषि मंत्री मीना ने पत्र के साथ जनजाति एवं क्षेत्रीय विकास मंत्री को बताया कि यहां जनजाति शोध संस्थान खोले जाने से प्रकृतिक पूजक समाज की संस्कृति से सर्व समाज को फायदा मिलेगा तथा जनजातीय समाज की विशिष्ट संस्कृति सरंक्षित रहेगी। 

कृषि मंत्री को क्यों लिखा पत्र

पंचायत समिति सदस्य नारंगी मीना ने बताया कि उनका गांव डांग क्षेत्र में आता है। इस क्षेत्र में जनजाति बहुत तादाद में रहती है। इस क्षेत्र में देश विदेश के पर्यटक भी जनजाति संस्कृति से रूबरू होते हैं। ऐसे में भुरिपहाड़ी गांव जनजाति शोध संस्थान के लिए सबसे बेहतर है।

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